जहाँ धर्म वहीँ जीत

 कांग्रेस के पतन का कारण..... इनके जैसे लोग ही है....


महाभारत युद्ध के पहले पांडवों का सेनापति कौन बने, इसके लिये राजा द्रुपद के यहाँ एक सभा का आयोजन हुआ। 


युधिष्ठिर, भीम, सात्यिकी सहित बड़े योद्धाओं ने राजा द्रुपद के नाम का अनुमोदन किया। अर्जुन इससे सहमत नहीं थे, वह धृष्टद्युम्न को बनाने चाहते थे।


सभा ने अंतिम निर्णय भगवान कृष्ण पर छोड़ दिया।


योगेश्वर भगवान बोले - एक ऐसी व्यक्ति को सेनापति बनना चाहिये , जिसके उपर आदर्श , निष्ठा , नैतिकता , विचारधारा का बोझ न हो।वह युद्ध में होने वाले परिवर्तन, आकस्मिक स्थितियों , विषम परिस्थितियों में निडर होकर निर्णय ले सके। 


महाराज द्रुपद उस काल के है, जँहा यह सारे बोझ है। अतः उचित यही होगा कि युवा धृष्टद्युम्न को सेनापति बनाया जाय।


18 दिन वह अकेले पांडवों के सेनापति रहे , कठोर निर्णय लिये।


उधर कौरव निष्ठावान , प्रतिज्ञाबद्ध , आदर्शवादी लोगों को सेनापति बनाते रहे। जो विजय से अधिक अपने व्यक्तित्व के लिये लड़ते रहे।


नेहरुनियन मॉडल में विश्वविद्यालय के प्रोफेसर, नौकरशाही से लेकर पत्रकारिता तक अयोग्य लोगों को ऋणी और निष्ठावान बनाया।


कांग्रेस का विचार था , जो कि एक समय ठीक ही था। संघ से यही निष्ठावान वामी , पत्रकार लड़ते रहेंगें। इधर गाँधी कि छवि के साथ वह सत्ता सुख भोगेंगें।


इसमें कोई संदेह नहीं है कि कांग्रेस का यह प्रयोग सफल रहा। लेकिन इधर भाजपा ने अपने सभी पुराने नेताओं को मार्गदर्शक मंडल में डाल दिया। प्रतिभाशाली दूसरे पंक्ति के नेताओं ने मोर्चा संभाला। 


कांग्रेस बार बार पटखनी खा रही है लेकिन वह समझ नहीं पा रही है। राज्यों में जीती भी वह क्षेत्रीय क्षत्रपों के कारण, विषय यह नहीं है कि कांग्रेस दो लोकसभा चुनाव हार गई , गम्भीर विषय यह है कि आगे दो लोकसभा चुनाव में वह लड़ाई में ही नहीं है।


             कांग्रेस के इस पतन में बहुत बड़ा कारण दुआ , रवीश , प्रसून जैसे वैचारिक अंधे लोग है। इनको कांग्रेस ने बखूबी पाला, एक समय इनकी पहुँच अंतःपुर तक थी। यह जो ऊर्जा कांग्रेस को दे रहे है , उसको सभी जानते है।


रवीश कुमार प्राइम टाइम में कोई कार्यक्रम प्रस्तुत करें , यदि वह विषय दो घँटे पहले हमको बता दिया जाय तो मैं लिखकर दे दू !90 % वही बोलेंगें। इस देश का हर व्यक्ति यह समझ चुका है कि यह लोग क्या बोलेंगें। 


दुआ मर गये ! मैं शोक व्यक्त करता हूँ। लेकिन इतनी घृणा से सड़ता व्यक्ति शायद ही मैंने देखा हो। उसके मुख से अहंकार की बदबू आती थी, जो असहनीय थी।


कांग्रेस एक राष्ट्रीय दल है , वह अब भी चाहे तो ऐसे व्याघातियो, आत्ममुग्ध लोगों से मुक्त हो सकती है।


रवीश कुमार, प्रसून जैसे लोग तो नहीं बदलने वाले। यह मोदी विरोधियों की वाह वाही में मदमस्त है।।


आज भी धर्म युद्ध चल रहा है 

कौरव बार बार सेनापति बदल रहे है और पड़ाव निष्ठावान है 


जीत उनकी होगी जो धर्म के साथ है 


जय श्री कृष्ण

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