नव वर्ष

 हर साल 31 दिसंबर को बहुत से लोग बताते हैं कि यह अपना नववर्ष नहीं है इसलिए हमें उसका बहिष्कार करना चाहिए।


यह बात ठीक है कि अपना नववर्ष 1 जनवरी को नहीं है लेकिन यह भी ठीक नहीं है कि वर्ष भर जिस कैलेंडर का उपयोग करते हैं, केवल 1 दिन उसका बहिष्कार करने की रस्म पूरी कर लें और फिर वर्ष भर उसी का उपयोग करते रहें।


इसलिए मुझे लगता है कि वर्ष भर जो लोग ग्रेगोरियन (अंग्रेजी) कैलेंडर को देखकर सारे काम करते हैं, उसी कैलेंडर के अनुसार जन्मदिन, एनिवर्सरी मनाते हैं, शादी के कार्ड पर, दुकान-मकान-प्रतिष्ठान के उदघाटन और गृहप्रवेश के आमंत्रण पत्र पर उसी कैलेंडर की तारीखें लिखते हैं, प्रतिदिन बोलचाल में जब कभी तारीख बतानी हो उसी कैलेंडर से बताते हैं, उधार कब चुकाऊंगा, घर वापस किस तारीख को आऊंगा, सामान की डिलिवरी कब होगी, टिकट कब का खरीदा है, स्कूल में परीक्षा कब है, ऐसी छोटी बड़ी बातों के लिए भी जो लोग वर्षभर अंग्रेजी कैलेंडर का उपयोग करते हैं, वे कृपया केवल आज ही के दिन उस कैलेंडर के तिरस्कार का सार्वजनिक प्रदर्शन न करें।


किसी से सहायता लेकर बाद में काम निकल जाने पर उसको तिरस्कृत और अपमानित करने वाला व्यक्ति कृतघ्न कहलाता है। यह अपना नववर्ष नहीं है लेकिन वर्षभर यही कैलेंडर उपयोग करते हैं। इस बात को न भूलें।


यह भी तर्क न दें कि आज केवल कैलेंडर ही बदल रहा है और तारीख ही बदल रही है। जब आप बताते हैं कि आपकी शादी कब हुई थी या आप 18 के कब हुए थे या आपने मकान कब बनवाया था, कार किस वर्ष खरीदी थी, पढ़ाई किस सन में पूरी हुई थी, नौकरी कब लगी थी, तब भी आप इसी कैलेंडर का हवाला देते हैं। इसलिए दीवार पर भले ही केवल कैलेंडर बदल रहा हो, लेकिन दैनिक जीवन में वर्ष ही बदल रहा है।


कैलेंडर के इस परिवर्तन को नववर्ष नहीं मानना चाहिए, इस बात से मैं सहमत हूं। लेकिन उसका तिरस्कार करने से कुछ नहीं होने वाला है। जिस नववर्ष को अपना मानते हैं और जिस कालगणना को आप अपना बताते हैं, प्रतिदिन जीवन में उसका उपयोग शुरू कीजिए।


अपना जन्मदिन, एनिवर्सरी आदि सब जीस दिन अपनी हिन्दू तिथि के अनुसार मना आएंगे इस कैलेंडर के अनुसार नहीं तब विरोध करे। आप यह सब स्वयं करना आरंभ कीजिए। दूसरे की लाइन मिटाने की आवश्यकता नहीं है, उसके बजाय अपनी सही लाइन को बड़ा बनाने पर ध्यान दीजिए।


केवल एक दिन इसका दिखावटी विरोध करना निरर्थक भी है और अनुचित भी। इस पोस्ट को आप दो चार बार ठीक से पढ़कर उस पर विचार करेंगे, तभी बात ठीक से समझ आएगी, अन्यथा विषय से भटकने की ही संभावना है।

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