हिन्दू चिंतन दृष्टि

 भारत की एकता और सुरक्षा के लिए बड़ा अवसर है, लेकिन हमें बदलना होगा ..


सऊदी अरब ने तब्लीगी जमात पर पांबन्दी लगा दी है।  वहाँ के प्रिंस सलमान धड़ा-धड़ इस्लामिक मान्यताओं को बदल रहे हैं, शुक्रवार की जुम्मे की छुट्टी भी बंद कर दी, सिनेमा खोल रहे हैं ... महिलाओं को अधिकार दे रहे हैं .. प्रिंस सलमान अगले अतातुर्क हो सकते हैं ?..


कुछ खबर ऐसी भी आ रही हैं कि अरब मूल के पढे लिखे युवा अब अपने प्राचीन मान्यताओं को खोज रहे हैं, उन्हें जान रहे हैं, समझ रहे हैं और उनसे जुड़ रहे हैं ...


अगले कुछ वर्षों में सऊदी अरब पूरी तरह बदल जाएगा इसे कोई नहीं रोक सकता है .. इसी प्रकार ईरान में भी लोग प्राचीन फारस और जरथुष्ट्र धर्म को जान रहे हैं और उसके त्योहारों को मना रहे हैं ... 


बाकी यूरोप में तो इस्लाम छोड़ने वालों की संख्या तेजी से बढ़ रही है  ... ये EX muslims,  Awesome_without_ Allha का कैम्पेन ही चला रहे हैं, सैकड़ों मौलाना इस्लाम छोड़कर इस्लाम की बर्बरता को उजागर कर रहे हैं। कई यू ट्यूब चैनल बने हुए हैं  .... 


कई मुर्तद हो चुके मुस्लिम डर की वजह से अभी छिपे हुए हैं या चेहरा छिपाकर बात करते हैं .. लेकिन ज्यादा समय यह नही चलेगा ... 


क्योंकि आज इस्लामिक विचार आप्रसंगिक हो रहे हैं .. अब आप डराकर लोगों को अपनी बात नही मनवा सकते हैं ... न ही गले काटने का डर दिखाकर या जहन्नुम की आग से डराकर लोगों को इस आसमानी सोच के साथ जोड़ सकते हैं ...


भारत में भी ऐसे लोगों की संख्या धीरे धीरे बढ़ रही हैं, अब इन्हें सहारा चाहिए, इन्हें एक ऐसा कंधा चाहिए जिस पर सर रख कर ये अपने दुःख को बता सकें .. 


हमें इन पीड़ित लोगों को नई सोच और विचार समझाने की जरूरत है कि "ईश्वर को देखने का नया तरीका भी हो सकता है, इनके जीवन में उत्साह और उमंग भरने की जरूरत है, इनके डर को निकालने की जरूरत है "...


इन्हें बताने की जरूरत है कि "ईश्वर डराता नही है, ना ही जहन्नुम की आग जैसी कोई चीज है ... ईश्वर प्रेम करता है और कर्मों के आधार पर चीजें तय करता है"  .. 


अतः हमारे विचारकों और धर्माचार्यों को समय के साथ बदलना होगा । हिंदू धर्म के विविध रूपों का प्रसार करना होगा ... ताकि आसमानी आतंक को छोड़ने वाले लोग सनातन संस्कृति में घर वापसी कर सकें ....


क्योंकि हिंदू धर्म को समझना आसान तो है नही और जो लोग आसमानी विचार छोड़ रहे हैं। वे भी कोई एक तरह के लोग नही है। कुछ पढे लिखे हैं, तो कुछ बिना पढ़े लिखे ... अतः सबके लिए अलग अलग विचारों को देना होगा ...


जैसे हम वैदिक धर्म और दर्शन को सरलता से समझाकर उन लोगों को जोड़ सकते हैं जो तर्कशील हैं,ज्यादा पढे लिखे हैं ... कोई भी वैज्ञानिक सोच वाला व्यक्ति वेदों की ऋचाएं और उपनिषदों में ब्रह्म की व्याख्या को जानकर कभी उनसे दूर नही जा सकता है ... जब उसे यह पता चलेगा कि वास्तविक ईश्वर पूरी तरह वैज्ञानिक होता है ।वह कहीं बाहर नही रहता है बल्कि यह ब्रह्मंड ही ईश्वर का प्रकट रूप है ... यह उसके नजरिए को ही बदल देगा।


इसी प्रकार सामान्य शिक्षा प्राप्त व्यक्ति, जो ऐसे ईश्वर को चाहते है जो उसकी हर समय मदद के लिए तैयार हो जिसके साथ वह सुख-दुःख बांट सकें और उसका ईश्वर कोई ठोस रूप में हो तो उसके लिए पौराणिक हिन्दू धर्म को नए सिरे से व सरल रूप में बताना होगा ... 


यहाँ उसे हिन्दू धर्म का सरलतम और सुगम रूप मिलेगा , यहाँ ब्रह्म का प्रकट रूप है ,त्यौहार हैं, उत्सव है, उल्लास है, जीवन में खुशियॉ हैं ... 


जो व्यक्ति बहुत भावुक होगा, कम जानकार होगा। जिसको पुराण भी समझ में नही आते होंगे .. वह भक्ति की महान परम्परा से जुड़ जाएगा ... यहाँ कुछ नही करना है बस ईश्वर का नाम लेना है ... मध्य काल के भक्ति सन्तों तुलसीदास, मलूकदास, मीरा, कबीर, शंकरदेव, आदि ने हिंदू धर्म को इतना सरल बना दिया है कि कोई भी महिला या पुरुष ईश्वर से जुड़ सकता है ...


अतः हमारे लोगों को भक्ति की महान परम्परा को सिर्फ नाच गान से उठाकर उसे उसके वास्तविक रूप में बताने की जरूरत है  .. 


इसके साथ ही हमें वैदिक धर्म में विकसित हुई नास्तिक परम्परा को भी नए सिरे से बताना होगा कि नास्तिक का मतलब कुतर्क करना नही होता है .. बल्कि सनातन धर्म में नास्तिक का अर्थ है "वेदों में वर्णित ईश्वर की सत्ता के बारे में प्रश्न करना, उस पर सवाल उठाना ...


उन्हें बताना होगा कि हमारे यहाँ नास्तिकता का भी सम्मान किया जाता है, उनका गला नही रेता जाता है .. बल्कि वास्तविक नास्तिकों का,  जिन्होंने ऐसा किया हिंदू धर्म उन्हें भी भगवान का दर्जा देता है जैसे बुद्ध, महावीर, महर्षि चार्वाक आदि ...


बल्कि ऋग्वेद के नासदीय सूक्त में भी अनेक विद्वान नास्तिकता का बीज पाते हैं .. जहाँ ब्रह्म की सत्ता पर प्रश्न किया गया है। रामायण, महाभारत में भी नास्तिकता के अनेक प्रसंग मिलते हैं ... इसी प्रकार वैष्णव, शैव के विभिन्न पंथों को यह बात समझनी होगी और अपना रूप समय के साथ बदलना होगा शिक्षा को आधुनिक युग के संदर्भ में बताना होगा ...


आज यह हमारे लिए बड़ा अवसर है .. क्योंकि जल्द ही देश दुनिया में बड़ी लहर इन लोगों की आने वाली है जो खूनी आसमानी विचारों को त्यागेंगे ...

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